आज हम आप लोगों को भगवान श्री राम की मृत्यु के समय क्यों जाना पड़ा था हनुमान जी को नागलोक उसके बारे में कुछ जानकारियां बताएंगे जिन्हें आप शायद बिल्कुल भी नहीं जानते इस बात से बेखबर भी होंगे या तो बिल्कुल भी नहीं जानते होंगे तो आज हम आप लोगों को भगवान श्री राम की मृत्यु के समय क्यों जाना पड़ा था हनुमानजी को ना उसके बारे में बताएंगे अगर आप जानना चाहते हैं तो हमारे पोस्ट को पूरा जरूर पढ़िए तो आइए जानते हैं हनुमानजी को नाग लोग क्यों जाना पड़ा था।

Third party image reference
जानिए क्यों भगवान राम की मृत्यु के वक्त हनुमान जी को जाना पड़ा नाग लोक-
जिस तरह दुनिया में आने वाला हर इंसान की मृत्यु निश्चित होती है। उसी तरह इंसान रूप में जन्म लेने वाले भगवान के अवतारों का भी इस धरती पर एक निश्चित समय था, वो समय समाप्त होने के बाद उन्हें भी अपने प्राण त्याग करके अपने लोक वापस लौटना पड़ा था। उसी प्रकार भगवान श्री राम भी इस लोक को छोड़कर वापस विष्णुलोक गए।भगवान श्री राम के मृत्यु वरण में सबसे बड़ी बाधा उनके प्रिय भक्त हनुमान थे। क्योंकि हनुमान के होते हुए यम की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो राम के पास पहुँच चुके लेकीन स्वयं श्री राम से इसका हल निकाला।श्रीमद्भगवद्गीता में श्री कृष्ण की ये बातें सिखाती हैं जीवन जीने का ढंगआइये जानते है कैसे श्री राम ने इसका हल निकाला -एक दिन, राम जान गए कि उनकी मृत्यु का समय हो गया था। वह जानते थे कि जो जन्म लेता है उसे मरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि "यम को मुझ तक आने दो। मेरे लिए वैकुंठ, मेरे स्वर्गिक धाम जाने का समय आ गया है"। लेकिन मृत्यु के देवता यम अयोध्या में प्रवेश करने से डरते थे क्योंकि उनको राम के परम भक्त और उनके महल के मुख्य प्रहरी हनुमान से भय लगता था।

Third party image reference
यम के प्रवेश के लिए हनुमान को हटाना जरुरी था। इसलिए राम ने अपनी अंगूठी को महल के फर्श के एक छेद में से गिरा दिया और हनुमान से इसे खोजकर लाने के लिए कहा। हनुमान ने स्वंय का स्वरुप छोटा करते हुए बिलकुल भंवरे जैसा आकार बना लिया और केवल उस अंगूठी को ढूढंने के लिए छेद में प्रवेश कर गए।
वह छेद केवल छेद नहीं था बल्कि एक सुरंग का रास्ता था, जो सांपों के नगर नाग लोक तक जाता था। हनुमान नागों के राजा वासुकी से मिले और अपने आने का कारण बताया वासुकी हनुमान को नाग लोक के मध्य में ले गए जहां अंगूठियों का पहाड़ जैसा ढेर लगा हुआ था। वासुकी ने कहा "यहां आपको राम की अंगूठी अवश्य ही मिल जाएगी"। हनुमान सोच में पड़ गए कि वो कैसे उसे ढूंढ पाएंगे क्योंकि ये तो भूसे में सुई ढूंढने जैसा था। लेकिन सौभाग्य से, जो पहली अंगूठी उन्होंने उठाई वो राम की अंगूठी थी।आश्चर्यजनक रुप से, दूसरी भी अंगूठी जो उन्होंने उठाई वो भी राम की ही अंगूठी थी।

Third party image reference
वास्तव में वो सारी अंगूठी जो उस ढेर में थीं, सब एक ही जैसी थी। "इसका क्या मतलब है?" वह सोच में पड़ गए।वासुकी मुस्कुराए और बाले, "जिस संसार में हम रहते है, वो सृष्टि व विनाश के चक्र से गुजरती है। इस संसार के प्रत्येक सृष्टि चक्र को एक कल्प कहा जाता है। हर कल्प के चार युग या चार भाग होते हैं। दूसरे भाग या त्रेता युग में, राम अयोध्या में जन्म लेते हैं।

Third party image reference
एक वानर इस अंगूठी का पीछा करता है और पृथ्वी पर राम मृत्यु को प्राप्त होते हैं। इसलिए यह सैकड़ो हजारों कल्पों से चली आ रही अंगूठियों का ढेर है। सभी अंगूठियां वास्तविक हैं। अंगूठियां गिरती रहीं और इनका ढेर बड़ा होता रहा। भविष्य के रामों की अंगूठियों के लिए भी यहां काफी जगह है"।हनुमान जान गए कि उनका नाग लोक में प्रवेश और अंगूठियों के पर्वत से साक्षात, कोई आकस्मिक घटना नहीं थी। यह राम का उनको समझाने का मार्ग था कि मृत्यु को आने से रोका नहीं जा सकेगा। राम मृत्यु को प्राप्त होंगे। संसार समाप्त होगा। लेकिन हमेशा की तरह, संसार पुनः बनता है और राम भी पुनः जन्म लेंगे